Sunday, August 20, 2023

कविता की जरूरत


 
कुँवर नारायण

    नई कविता आन्दोलन के सशक्त हस्ताक्षर कुँवर नारायण अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक के प्रमुख कवियों में रहे हैं । 2009 में उन्हें वर्ष 2005 के लिए भारत के साहित्य जगत के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया । कुँवर नारायण को अपनी रचनाशीलता में इतिहास और मिथक के जरिये वर्तमान को देखने के लिए जाना जाता है । उनका रचना संसार इतना व्यापक एवं जटिल है कि उसको कोई एक नाम देना सम्भव नहीं । इन्होंने कविता के संबंध में अनेक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अभिव्यक्त किए हैं। आज का समय कविता के वजूद को लेकर आशंकित है । शक है की यांत्रिकता के दबाव से कविता का अस्तित्व नहीं रहेगा । ऐसे में यह कविता की अपार संभावनाओं को टटोलने का अवसर देती है । कविता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने भी कहा है - "कविता की प्रेरणा से कार्य में प्रवृत्ति बढ़ जाती है ।" कविता सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है । कविता के माध्यम से प्राप्त होनेवाला सुख किसी भी भौतिक सुख से अलग और बेहतर होता है । 
    कवि कविता के संबंध में लिखते हैं कि मानवमात्र के लिए कविता की बड़ी जरूरत है । कविता हमें बहुत कुछ दे सकती है । अगर हमने कविता को अपने जीवन में जगह दी तो वह हमारे लिए बहुत कुछ हो सकती है । जिसप्रकार बिना फल का पेड़ किसी काम का नहीं होता । फलों को जगह देने के कारण पेड़ का महत्व बढ़ जाता है उसी तरह आकाश में चाँदनी छिटकी हो तो आकाश सुंदर दिखाई देता है ।  रात चाँदनी को जगह देती है वह सुंदर हो उठती है । हमें भी अपने जीवन में कविता को जगह देनी है । हम अपने हृदय के किसी कोने में कविता के लिए जगह रख सकते हैं । कविता के लिए मानवतावादी सोच जरूरी है । प्रेम में कविता न हो तो कैसे होगा ? लेकिन वह प्रेम नहीं हो सकता है । कोई कविता के बिना भी जी सकता है । कवि के अनुसार यह असंभव है । कवि कविता रहित प्रेम की कल्पना नहीं करता । 
        

 कविता की जरूरत

    बहुत कुछ दे सकती है कविता
क्योंकि बहुत कुछ हो सकती है कविता
जिन्दगी में
अगर हम जगह दें उसे
जैसे फलों को जगह देते हैं पेड़
जैसे तारों को जगह देती है रात
हम बचाए रख सकते हैं उसके लिए
अपने अन्दर कहीं
ऐसा एक कोना
जहाँ जमीन और आसमान
जहाँ आदमी और भगवान के बीच दूरी
कम से कम हो।
वैसे कोई चाहे तो जी सकता है
एक नितान्त कविता-रहित जिन्दगी
कर सकता है
कविता-रहित प्रेम !

स्रोत :
https://www.youtube.com/watch?v=Txp-BGMQryI